Friday, 2 December 2016

The Demise of Castro and the Lessons from History

Rajesh Tyagi/ 2.12.2016

Castro died at the age of 90, leaving behind a legacy and very important lessons to be learnt from it.

Sections of the rich and elite in the US and the world over rejoiced over and celebrated his death. To their understanding, death of Castro symbolizes the end of an era of brutal dictatorship, marked by a challenge to US hegemony on American continent and an alternative path of development based on rejection of the capitalist road. They hailed his death for good riddance from the red monster.

Castro’s supporters, however, mourned his demise as the end of a martyr who opened up a ‘new road to socialism’ through his dare-devil struggle against Batista regime and liberated Cuba from the shackles of imperialist domination.

At the outset, marxist revolutionaries, must reject the venomous propaganda against Castro, motivated as it is by the deep-rooted imperialist malice, vile prejudices and political ill-will against the Cuban revolution, by those who had all through supported bloody, predatory dictatorships everywhere in the world including in Latin Americas. 

The ruthlessness, of which Castro is accused repeatedly by the imperialist bigots, was the most legitimate answer of the revolution to the unlimited reactionary savagery perpetuated and forced on Cuban workers and toilers by the imperialist butchers and their client regimes in Cuba for decades before and after the revolution. 

Sunday, 27 November 2016

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी का आह्वान

२८ नवम्बर के एक दिवसीय भारत-बंद के पाखण्ड को
निर्णायक संघर्ष की ओर मोड़ो!

साथियो,

८ नवम्बर को भारत की पूंजीवादी-फासीवादी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा करके, मेहनतकश और गरीब जनता को बदहाली के मुंह में धकेल दिया है. काम-धंधे, रोजगार सब चौपट कर दिए गए हैं. पूरी नीति को इस तरह तैयार और लागू किया गया है कि उसका सारा बोझ गरीब, मेहनतकश जनता के ऊपर पड़ा है और इसका सारा लाभ बड़े बैंक और बैंकर समेट रहे हैं.

भगवा सरकार के इस कदम के खिलाफ, पहले ही दिन से, जनता में जबरदस्त आक्रोश फैला हुआ था. मगर विपक्ष की पार्टियों ने, खासतौर से झूठे वामियों, स्तालिनवादियों ने, इस आक्रोश को बड़ी चालाकी से ठंडा हो जाने दिया. उन्होंने जानबूझकर नोटबंदी के खिलाफ प्रतिरोध को संसद में दोगली और खोखली बहसों तक सीमित रखते हुए उफ़ान को उतर जाने दिया. अब अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिखावे भर के लिए ये पार्टियां एक दिन के भारत बंद का आयोजन कर रही हैं. इस बेदम प्रतिरोध को एक दिन तक सीमित रखने की घोषणा करके छद्म वामियों ने अपनी नीयत साफ़ कर दी है कि उनका उद्देश्य पूंजीवाद के विरुद्ध कोई कारगर संघर्ष करना या उसे नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि वे सिर्फ विरोध की नौटंकी भर कर रहे हैं.

Saturday, 19 November 2016

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी की अपील

‘रेड हंड्रेड’ संगठित करो!
फासीवाद के विरुद्ध ‘संयुक्त मोर्चा’ बनाओ !


एक के बाद दूसरी पूंजीवादी पार्टियों के, दशकों से चले आए भ्रष्ट कुशासन का लाभ उठाकर, अंततः फासिस्ट भाजपा सत्ता में आ गई. आकंठ, आर्थिक और राजनीतिक संकट में डूबे पूंजीपतियों ने फासीवाद के सामने समर्पण कर दिया है.

फासीवाद उभार पर है!  इसके उभार ने, सामाजिक और राजनीतिक जीवन के तमाम पहलुओं के लिए खतरा पैदा कर दिया है. इसकी हिट-लिस्ट में शामिल हैं- मजदूर, मेहनतकश, गरीब और वंचित.

फासिस्ट, बड़े कॉर्पोरेट के आतंकी कारिंदों और अमीरों, संभ्रांतों द्वारा प्रायोजित हिंसक आन्दोलन के सिवा कुछ नहीं हैं. पूंजीवाद एक बार फिर अपने बर्बर और पाशविक दांत दिखा रहा है. एक समूची सदी का क्रान्तिकारी अनुभव हमें निर्णायक रूप से दिखाता है कि फासीवाद से विवाद व्यर्थ है, उसे कुचलना ही होगा.

Appeal of the Workers’ Socialist Party

Organise the ‘Red Hundreds’
The United Front Against Fascists!


Taking advantage of corrupt misrule of the democratic parties of capitalism, that in succession to each other had remained in power for decades, fascist BJP has finally captured the power. Immersed in economic and political crisis to their neck, ruling capitalists have capitulated to fascists.

Fascism is on the rise! its advance poses real danger to every aspect of social and political life. It threatens to trample down under its boots everything live and vibrant. Working class, toilers, poor and deprived sections are on its hit list.

Fascists are nothing but the brutal, terrorist arm of the big corporate, the violent social movement sponsored by the rich and elite, the savage arm of capitalism. Engulfed in crisis, Capitalism is once again showing its predatory teeth.

Tuesday, 15 November 2016

वर्कर्स सोशलिस्ट पार्टी की अपील

खरबपतियों की दलाल, मोदी सरकार द्वारा, जनधन पर हमले के खिलाफ, मोर्चा खोलो!

नोटबंदी के खिलाफ देशभर में व्यापक संघर्ष छेड़ो!
देशी-विदेशी सभी बैंकों की बिना मुआवजा तुरंत जब्ती हो!
सभी बैंकों को मेहनतकश जनता के नियंत्रण में दो!  


अडानी-अम्बानी द्वारा निर्देशित मोदी सरकार ने, नोटबंदी के नाम पर जनधन पर खुला हमला बोल दिया है. दशकों में, आम मेहनतकश जनता ने जो कुछ भी जोड़ा-बचाया था, पूंजीपतियों ने, उस सबको ठग लेने के लिए जाल बिछाया है.
सत्ता और सरकार के शीर्ष पर बैठे लोगों ने, बैंकों में जमा जनधन से, आठ हज़ार करोड़ रुपये देकर, शराब व्यापारी विजय माल्या को देश से ही भगा दिया. कल गौतम अडानी को उससे भी बड़ा पैकेज दिया है. बैंकों में जमा, शेष लाखों-लाख करोड़ जनधन की भी इसी तरह, कॉर्पोरेट, मुनाफाखोरों और बड़े पूंजीपतियों को कर्जों और रियायतों के बतौर बन्दरबांट की जा रही है.

Sunday, 30 October 2016

ਜੇ.ਐਨ.ਯੂ 'ਚ ਹਮਲਾ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਰਾਸ਼ਟਰਵਾਦ ਦਾ ਸਵਾਲ

-ਰਾਜੇਸ਼ ਤਿਆਗੀ
ਅਨੁਵਾਦ-ਰਜਿੰਦਰ

ਨੋਟ- ਇਹ ਲੇਖ 9 ਫਰਵਰੀ ਦੀ JNU ਦੀ ਘਟਨਾ ਦੇ ਮੱਦੇਨਜ਼ਰ ਲਿਖਿਆ ਗਿਆ ਸੀ ਪਰ ਤਾਜ਼ਾ ਹਾਲਤਾਂ ਲਈ ਵੀ ਉਨਾ ਹੀ ਢੁਕਵਾਂ ਹੈ.

ਭਗਵਾ ਸਰਕਾਰ ਅਤੇ ਇਸਦੇ ਸਾਥੀਆਂ, ਸੱਜੇ-ਪੱਖੀ ਕੌਮਵਾਦੀਆਂ ਦੁਆਰਾ ਜੇ. ਐਨ. ਯੂ 'ਤੇ ਕੀਤੇ ਹਮਲੇ ਨੂੰ ਤੁਰੰਤ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਇੱਕ ਰੈਡੀਕਲ ਵਿਰੋਧ ਝੱਲਣਾ ਪਿਆ ਹੈ ਹੈਦਰਾਬਾਦ ' ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਰੋਹਿਤ ਵੇਮੂਲਾ ਦੀ ਖੁਦਕੁਸ਼ੀ  ਦੇ ਫੌਰੀ ਨਤੀਜੇ ਵਜੋਂ, ਜੇ.ਐਨ.ਯੂ ' ਹਮਲੇ ਨੇ ਹਾਂਡੀ ਨੂੰ ਉਬਾਲ ਦਰਜੇ 'ਤੇ ਲੈ ਆਉਂਦਾ ਹੈ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਭੈਭੀਤ ਕਰਨ ਲਈ ਇੱਕ ਭਗਵਾ ਯੁੱਧਨੀਤੀ ਘਾੜਿਆਂ ਵਲੋਂ ਨਿਰਦੇਸ਼ਿਤ, ਤਖਤਾਪਲਟ ਦਾ ਗਰਭਪਾਤ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਲਿਆਇਆ, ਪਰ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਬੇਕਦਰੀ ਅਤੇ ਬੇਇੱਜਤੀ ਕੀਤੀ ਹੈ ਜਿਸਦਾ ਗਰਾਫ਼ ਪਿਛਲੇ ਮਹੀਨਿਆਂ ਤੋਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ਼ ਡਿੱਗ ਰਿਹਾ ਸੀ

Thursday, 13 October 2016

ਯੂਕਰੇਨ ਤੋਂ ਯਮਨ ਤੱਕ: ਤੀਜੀ ਸੰਸਾਰ ਜੰਗ ਦੇ ਮੰਡਰਾ ਰਹੇ ਬੱਦਲ

ਰਾਜੇਸ਼ ਤਿਆਗੀ03.05.2015
ਅਨੁਵਾਦ- ਰਜਿੰਦਰ

ਸਰਮਾਏਦਾਰੀ ਦੀਆਂ ਵਿਰੋਧਤਾਈਆਂਜੋ ਦੋ ਸੰਸਾਰ ਜੰਗਾਂ ਦੁਆਰਾ ਵੀ ਅਣਸੁਲਝੀਆਂ ਰਹੀਆਂ ਹਨਉਦੋਂ ਤੋਂ ਮਨੁੱਖਤਾ 'ਤੇ ਮੰਡਰਾਉਣਾ ਜ਼ਾਰੀ ਰਹੀਆਂ ਹਨਪੂੰਜੀਵਾਦੀ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਰਾਜਾਂ ਦਰਮਿਆਨ ਅਣਗਿਣਤ ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਟਕਰਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਰੂਪਾਂਤਰਿਤ ਹੋਈਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਮੁੜ ਤੋਂ ਤੀਜੀ ਸੰਸਾਰ ਜੰਗ ਦੇ ਖਤਰੇ ਲਈ ਉਤਾਰੂ ਹੋਣ ਲਈ ਤਿਆਰ-ਬਰ-ਤਿਆਰ ਹੋ ਗਈਆਂ ਹਨ ਖਤਰਾ ਸਿਰ 'ਤੇ ਹੈ ਸਾਮਰਾਜਵਾਦੀ ਤਾਕਤਾਂ ਉਹਨਾਂ ਦਰਮਿਆਨ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਖਹਿਭੇੜ ਜ਼ਰੀਏ ਇਹਨਾਂ ਵਿਰੋਧਤਾਈਆਂ ਦੇ ਹੋਰ ਹੱਲ ਦੇ ਯਤਨ ਲਈ ਨਾਕਾਮ ਹੋਈਆਂ ਹਨ ਸਾਮਰਾਜਵਾਦੀ ਤਾਕਤਾਂ ਦਰਮਿਆਨ ਸੰਸਾਰ ਆਰਥਿਕਤਾ 'ਤੇ ਸਰਦਾਰੀ ਲਈ ਅਨੇਵਾਹ ਖਹਿਭੇੜਇਸਦੀ ਗਹਿਰਾਈ ਅਤੇ ਤੀਬਰਤਾ ' ਨੇਡ਼ਲੇ ਯੁੱਧ ਤੱਕ ਲੈ ਜਾਏਗਾ ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਦੁਸ਼ਮਣਾਨਾ ਤਾਕਤਾਂ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਸਣੇ ਸਮੂਹਿਕ ਵਿਨਾਸ਼ ਦੇ ਹਥਿਆਰਾਂ ਨਾਲ਼ ਲੈਸ ਹਨਤੀਜੇ ਮਹਾਂ-ਯੁੱਧ ਦਾ ਤਾਰਕਿਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਤਬਾਹੀ ਵਜੋਂ ਅਨੁਮਾਨ ਲਗਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਜਿਸ ਨਾਲ਼ ਪੂਰੀ ਮਨੁੱਖ ਜਾਤੀ ਦੇ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਣ ਦਾ ਖਤਰਾ ਹੈ